Tuesday, 6 January 2015

हिमाचल में कैदियों को वीडियो कान्फ्रेसिंग की सुविधा


हिमाचल प्रदेश की जेलों में बंद कैदियों की सुविधा के लिए देश में संभवत: पहली बार हाईटेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ये कैदी अपने परिजनों से वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से मिल पा रहे हैं। इस सुविधा का सबसे ज्यादा लाभ वे कैदी उठा रहे हैं, जिनके रिश्तेदार सरहद के उस पार से लेकर सात समुंदर पार रहते हैं। यहां की जेल में बंद एक कैदी विदेश में रह रही अपनी बेटी से सिर्फ वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से ही मिल पाया है। जबकि दूसरे कैदी भी इस सुविधा का लाभ उठाकर अपने परिजनों का कीमती समय और पैसों की बचत करते हैं। दिलचस्प है कि एक कैदी अपनी नवजात बेटी को पहली बार वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से ही देख पाया। अतिरिक्त महानिदेशक (जेल) एस.आर. मरदी ने आईएएनएस को बताया, "पिछले डेढ़ सालों में तकरीबन 1,100 वीडियो कान्फ्रेसिंग के अनुरोध प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 55 ब्रिटेन के और 22 फिनलैंड के अलावा दूसरे देशों के थे। (यहां की जेल में कई सारे विदेशी कैद की सजा काट रहे हैं)।" उन्होंने बताया कि 'जेल वार्ता' नाम की इस वीडियो कान्फ्रेसिंग सेवा से किसी कैदी से उसके घर के कई सदस्य मिल सकते हैं। जबकि जेल आकर मिलने वाले मुलाकातियों की संख्या निर्धारित होती है। मरदी के मुताबिक राज्य के सभी छह जेलों में वीडियो चैट की यह सुविधा www.prisons.nic.in नाम के पोर्टल से मुहैया कराई गई है। 

परमाणु युद्ध की आशंका, भारत रहे तैयार



इंटिग्रेटेड डिफेंस स्‍टाफ (आईडीएस) के प्रमुख एयर मार्शल पीपी रेड्डी ने सोमवार को कहा कि भारत को चीन और पा‍किस्‍तान दोनों मोर्चों पर लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए। साथ ही आगाह किया कि उपमहाद्वीप में परमाणु युद्ध की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता। उन्‍होंने यह भी कहा कि चीन पाकिस्‍तान को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है। बता दें कि पाकिस्‍तान के साथ 1999 में कारगिल युद्ध के बाद एक उच्‍च स्‍तरीय कमेटी की सिफारिश पर आईडीएस का गठन किया गया था। रेड्डी ने कहा, हमारे दोनों पड़ोसी देश परमाणु हथियारों से लैस हैं। आने वाले दिनों में आतंकवादी घटनाओं में वृदि्ध हो सकती है। भारत को दोनों मोर्चों पर सावधान रहने के साथ ही किसी भी तरह के युद्ध के लिए तैयार रहना होगा। उन्‍होंने कहा, चीन हमारे सभी पड़ोसी देशों को हथियारों का निर्यात, उन्‍हें कर्ज और उनके यहां बंदरगाहों का निर्माण कर रहा है। गौरतलब है कि एयर मार्शल का यह बयान ऐसे समय आया है जब नियंत्रण रेखा पर पाकिस्‍तान पिछले कई दिनों से लगातार भारी गोलीबारी कर रहा है।

Monday, 5 January 2015

डिल्मा रूसेफ: जेल से राष्ट्रपति भवन तक का सफर



दूसरी बार ब्राजील की राष्ट्रपति बनीं डिल्मा रूसेफ पीएम मोदी के साथ (फाइल फोटो) डिल्मा रूसेफ ने 2 जनवरी 2015 को दूसरी बार ब्राजील के राष्ट्रपति पद की शपथ ली. शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपनी सरकार की सोशल वेलफेयर स्कीम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया, जिससे लाखों लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाया जा सके. डिल्मा रूसेफ का जन्म ब्राजील के दक्षिण-पूर्वी इलाके में 14 दिसंबर 1947 को हुआ था. उन्होंने पहली बार राष्ट्रपति पद की शपथ 1 जनवरी 2011 को ली थी. अपने कड़े तेवरों के कारण 'आयरन लेडी' के नाम से मशहूर डिल्मा रूसेफ कड़ी मेहनत और ईमानदार छवि के चलते आज ब्राजील के राजनीति में सबसे ऊंचे मुकाम पर पहुंच गई हैं, लेकिन यह सफर इतना आसान भी नहीं था. आइये जानते हैं डिल्मा रूसेफ के बारे में खास बातें.... जेल में सहा टॉर्चर डिल्मा 1998 में वर्कर्स पार्टी में शामिल हुईं थीं. उससे पहले वह सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की सदस्य थीं. उन्होंने पोर्टो अलेग्रे के नगर प्रशासन में भी काम किया. 1964 से 1985 तक ब्राजील में चले मिलिट्री रूल के दौरान उन्होंने सैनिक शासकों के खिलाफ हथियारबंद प्रतिरोध में हिस्सा लिया था, जिसकी वजह से उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था और जेल में उन्हें काफी टॉर्चर सहना करना पड़ा था. 2003 से सत्ता में है डिल्मा की पार्टी सैनिक तानाशाही के दौरान 1980 में गठित लेबर पार्टी राजनीतिक प्रतिरोध का गढ़ बन गई थी. इस पार्टी ने ब्राजील को फिर से लोकतांत्रिक बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई. लुइस इनासियो लूला दा सिल्वा के रूप में पहली बार 2003 में एक मजदूर (वकर्स पार्टी) राष्ट्रपति भवन में पहुंचा और इसके आठ साल बाद 2011 में डिल्मा रूसेफ देश की पहली महिला राष्ट्रपति बनीं और यहीं से सत्ता के गलियारों में नए सूरज का उदय हुआ. मंत्रियों पर कड़ी कार्रवाई डिल्मा को अपने पहले कार्यकाल में कई परेशानियों से दो-चार होना पड़ा. कई बार तो ऐसा लगा कि सत्ता में उनकी फिर से वापसी नहीं सकेगी, लेकिन उन्होंने कड़े कदम उठाकर डैमेज कंट्रोल किया. डिल्मा की सरकार की छवि एक समय बेहद खराब हो गई थी, लेकिन उन्होंने भ्रष्टाचार के सभी दाग अपने मंत्रियों को हटाकर धोने की ईमानदार कोशिश की और यही कारण है कि आज वह दूसरी बार राष्ट्रपति चुनी गई हैं. ऐतिहासिक बदलाव डिल्मा के प्रयासों से ब्राजील में घरेलू नौकरों के लिए संविधान में संशोधन किया गया है. इस बदलाव को ऐतिहासिक कहा जा रहा है. संशोधन के जरिए नौकर, दाई, बाई या चौकीदारी का काम करने वाले 60 लाख लोग श्रम कानून के दायरे में लाए गए हैं. अमेरिका को भी दिखाए तेवर डिल्मा ने 2013 में अमेरिका का दौरा रद्द कर दिया था. उस वक्त खुलासा हुआ था कि अमेरिका ने उनकी जासूसी कराई थी, जिसके बाद डिल्मा ने अमेरिका से माफी मांगने को कहा था, जिससे अमेरिका ने इनकार कर दिया था. उन्होंने एक रेडियो इंटरव्यू में कहा था, 'मैं यात्रा पर जा रही थी. हमने कहा कि समाधान का एकमात्र रास्ता है. अमेरिका को इस घटना पर माफी मांगनी चाहिए और दोबारा ऐसा न होने का वादा करना चाहिए.' विरोध प्रदर्शनों से ऐसे निपटीं 2013 में हुए जन प्रदर्शनों के बीच डिल्मा रूसेफ ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी के लिए कानून पास कराया था. इसके जरिए उन्होंने खनिज तेल से होने वाली आमदनी का 75 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा और 25 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किए जाने की व्यवस्था कराई. तत्काल हालात काबू में करने के लिए उनकी सरकार ने क्यूबा, स्पेन, पुर्तगाल और अर्जेंटीना से 14,000 डॉक्टर भी मंगवाए थे.

देश से बाहर सर्वर रखने वाली वेबसाइटों को ब्लॉक करने में सरकार की सांस फूली



भारत सरकार ने हाल ही में कुछ वेबसाइटों और लिंक्स को ब्लॉक करने का फैसला किया. 32 ऐसी वेबसाइटों का परिचालन भारत में बंद कर दिया गया, जिनपर देश के खिलाफ कंटेंट था या आतंकियों के समर्थन में कुछ था. लेकिन सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन वेबसाइटों को लेकर है, जिनके सर्वर देश से बाहर हैं. सुरक्षा एजेंसियों को ऐसी वेबसाइटों के मामले में सबसे बड़ी दिक्कत यह आ रही है कि इनमें से कई वेबसाइटों में कॉन्टैक्ट डिटेल है ही नहीं. इनके मालिक का कुछ पता नहीं है और इनके सर्वर विदेशों में कहीं लगे हैं. एजेंसियां ऐसी वेबसाइटों के खिलाफ कार्रवाई करने में असमर्थ महसूस कर रही हैं, जिनकी कोई कॉन्टैक्ट डिटेल पता नहीं लग रही है और इनके सर्वर भी अमेरिका या यूरोप में हैं. इन वेबइसाइटों पर धड़ल्ले से देश के खिलाफ अभियान और चर्चा चल रही है, यही नहीं कई आतंकी गुट भी इन पर सक्रिय हैं. भारत सरकार ने कुछ वेबसाइटों और लिंक्स को ब्लॉक करने का फैसला किया. 32 ऐसी वेबसाइटों का परिचालन भारत में बंद हो गया है जो देश के खिलाफ या आतंकियों का समर्थन कर रहीं थीं. इनमें से केवल 7 वेबसाइटों ने सरकारी नोटिस का जवाब दिया और माना कि वे देश के खिलाफ कंटेंट को मान्य नहीं करेंगी. इन वेबइसाइटों के जरिए ISIS से जुडे कंटेंट को प्रचारित किए जाने की शिकायतें मिलने के बाद ये कदम उठाया गया था. इन वेबसाइटों पर सरकारी जांच में सहयोग ना करने का भी आरोप लगा था. इन वेबसाइटों से आपत्त‍िजनक सामग्री हटाने के लिए कहा गया था, जिन्होंने सरकार का आदेश माना उन्हें दोबारा शुरू कर दिया गया और अन्य को भारत में बंद कर दिया गया है. इन 32 वेबसाइट को बंद करने के कदम को लेकर ट्विटर व सोशल मीडिया के दूसरे मंचों पर हो रही आलोचना से बेफिक्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. सरकार की ओर से यह कार्रवाई उस वक्त की गई, जब यह पाया गया कि देश में अशांति पैदा करने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने के मकसद से इन वेबसाइट पर सामग्री पोस्ट की गईं. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के अधिकारियों ने कहा कि इनमें से कुछ वेबसाइट का इस्तेमाल ISIS के कथित सदस्य अरीब मजीद के बारे में सामाग्री का दुष्प्रचार करने व कनार्टक के भटकल के निवासी अनवर हुसैन की मौत के बारे में दुष्प्रचार फैलाने के लिए किया गया. मजीद को एनआईए ने गिरफ्तार किया है. अदालत के आदेश के मद्देनजर विभाग ने इन वेबसाइट की सामाग्री की जांच की और कहा कि ये वेबसाइट सोशल मीडिया वेबसाइट नहीं हैं.

न्यू जर्सी में होगा आगामी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन



अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन का आयोजन आगामी अप्रैल में न्यू जर्सी में किया जाएगा। आयोजकों ने कहा है कि सम्मेलन की विषयवस्तु 'हिन्दी जगत का प्रसार : संभावनाएं और चुनौतियां' होगी। तीन से पांच अप्रैल के बीच होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय हिन्दी सम्मेलन में दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हिन्दी के विद्वान एकत्र होंगे और वे हिन्दी के अध्ययन-अध्यापन की मौजूदा स्थिति समेत कई चीजों पर चर्चा करेंगे। सम्मेलन के संचालक अशोक ओझा ने कहा कि- 'सम्मेलन में भाग लेने वाले लोग व्यक्तिगत एवं संस्थागत तौर पर की जाने वाली साझेदारियों और नेतृत्व और क्षमता एवं अवसंरचना निर्माण कौशल आदि के साथ-साथ सामग्री चयन एवं विकास के लिए वित्तीय मदद, शिक्षकों के पेशेवर विकास और स्वयंसेवी प्रबंधन जैसे मुद्दों पर भी चर्चा कर सकते हैं।' उन्होंने कहा, 'हम 'उच्च शिक्षा में हिन्दी', 'उद्यम और वाणिज्य में हिन्दी के इस्तेमाल को बढ़ावा', 'हिन्दी के लिए सामुदायिक सहयोग', 'हिन्दी के अध्ययन और अध्यापन की मौजूदा स्थिति' समेत विभिन्न मुद्दों पर सत्र आयोजित करेंगे।' ओझा ने कहा कि सम्मेलन की विषयवस्तु भाषाई शिक्षा (सरकारी एवं निजी), सरकार एवं औद्योगिक समुदायों द्वारा भारत के भीतर और बाहर हिन्दी की गुणवत्ता के विस्तार एवं विकास के लिए समन्वित प्रयासों की बढ़ती जरूरतों को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि यह सम्मेलन सामुदायिक सदस्यों और नेताओं, भाषा विशेषज्ञों, नीति निर्माताओं, शिक्षा प्रबंधकों और अमेरिका, कनाडा, दक्षिणी अमेरिका एवं त्रिनिदाद एंड टोबेगो जैसे कैरीबियाई देशों के साथ भारत के विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करेगा, जहां वे एकसाथ मिलकर अपने विचारों एवं शोधों को साझा कर सकते हैं, विभिन्न अवसरों को जांच सकते हैं, भविष्य के लिए योजनाएं बना सकते हैं, चुनौतियों की पहचान कर सकते हैं और उत्तरी अमेरिकी एवं कैरीबियाई क्षेत्र में हिन्दी को बढ़ावा देने के लिए उपाय ढूंढ़ सकते हैं।

रात्रि पाली में काम करना घटा सकता है आपकी उम्र


लगातार रात्रि पाली में बदल-बदल कर काम करना स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक साबित हो सकता है और इसके कारण फेफड़े का कैंसर और हृदयरोग से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं, जो आपकी जल्द मौत का भी कारण बन सकती है। एक ताजा शोध में बताया गया है कि पांच या इससे अधिक वर्षो तक बदल-बदल कर रात्रि पाली में काम करने वाली महिलाओं में हृदयरोग से जुड़ी समस्याओं के कारण मृत्युदर बढ़ा पाया गया, जबकि 15 वर्ष से अधिक समय तक काम करने वाली महिलाओं में फेफड़े के कैंसर से मृत्यु होने की दर में इजाफा देखा गया। अध्ययन में महीने में कम से कम तीन पालियां रात में करने वालों को शामिल किया गया। हारवर्ड मेडिकल स्कूल की सहायक प्राध्यापिका इवा शेर्नहैमर ने बताया, "इस शोध के परिणाम रात्रि पाली में काम करने और स्वास्थ्य या लंबी आयु के बीच संभावित हानिकारक संबंधों के पूर्व सबूतों को प्रमाणित करते हैं।" नींद और हमारी दैनिक जैविक क्रियाएं हृदय सर्केडियन सिस्टम दिल के स्वास्थ्य और कैंसर के ट्यूमर को बढ़ने से रोकने में बेहद अहम होती हैं। इवा ने बताया, "चूंकि दुनियाभर में रात्रि पाली में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है, अत: यह अध्ययन संभवत: दुनिया में सबसे बड़े समूह से संबंधित अध्ययन है।" अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने अमेरिका में नर्सो के स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ा रखने वाली संस्था नर्सेज हेल्थ स्टडी (एनएचएस) द्वारा दर्ज 22 वर्ष के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इस अमेरिकी संस्था से लगभग 75,000 नर्से पंजीकृत हैं। विश्लेषण में पाया गया कि छह से 15 वर्षो तक बदल-बदल कर रात्रि पाली में काम करने वाली नर्सो की मृत्यु दर 11 फीसदी अधिक रही। इनमें दिल की बीमारी से होने वाली मृत्यु की दर 19 फीसदी अधिक पाई गई। 15 या इससे भी अधिक वर्षो से रात्रि पाली में काम कर करने वाली महिलाओं में फेफड़े के कैंसर से मौत होने का खतरा 25 फीसदी अधिक पाया गया। यह अध्ययन 'अमेरिकन जर्नल ऑफ प्रीवेंटिव मेडिसिन' के ताजा अंक में प्रकाशित हुआ। 

Saturday, 3 January 2015

वैज्ञानिकों ने खोज निकाला कैंसर की कोशिकाओं से निपटने का तरीका



अमरीकी वैज्ञानिकों ने हालिया शोध में विशेष प्रकार का परमाणु खोजा है, जो कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में सक्षम होगा। यह परमाणु कैंसर कोशिकाओं के विकास पर लगाम लगाकर उन्हें सिकोड़ेगा। अमरीका के टैक्सस विश्वविद्यालय के उत्तर-पूर्वी मेडिकल सेंटर के वैज्ञानिकों ने चुहिया पर प्रयोग कर कैंसर कोशिकाओं के विकास का अध्ययन किया। "6-थायोड जी" का कमाल कैंसर कोशिकाओं पर लगाम लगाने वाले इस परमाणु को वैज्ञानिकों ने "6-थायोड जी" का नाम दिया है। शोध संस्थान के डॉ. जेरी ब्ल्यू शे का कहना है कि यह परमाणु कैंसर कोशिकाओं की विशेष प्रकार की क्रियाविधि को निशाना बनाता है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में कोशिका की उम्र को भी ध्यान रखा जाता है। दवाओं से लगता है समय वैज्ञानिकों का दावा है कि अब तक विकसित की गई कैंसर दवाओं से इस रोग को खत्म करने में खासा समय लगता है, मगर नए खोजे गए परमाणु से कम समय में इलाज किया जा सकता है। यह शोध कैंसर डिस्कवरी नाम के जर्नल में प्रकाशित किया गया।

vaigyaniko ne khoj nikala kainsar ki